एक छोटे से गाँव में एक छोटे से लड़के का नाम राहुल था। वह बहुत ही प्यारा और समझदार था। उसका सपना था कि वह एक दिन बड़ा आदमी बनेगा और अपने माता-पिता का नाम रोशनी में लाएगा।

राहुल का पड़ोसी लड़का, आर्यन, भी उसका अच्छा दोस्त था। वे दोनों हमेशा साथ खेलते और पढ़ाई में भी साथ रहते थे। वे दोनों साथ में पढ़ते-लिखते और सपनों की बातें करते रहते थे।

जब वे बड़े होने लगे, तो उनके सपनों की दिशा में कुछ बदल गया। राहुल का सपना था कि वह इंजीनियर बनेगा और आर्यन का सपना था कि वह डॉक्टर। वे दोनों बहुत मेहनती थे और अपने सपनों को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करते थे।

लेकिन जिंदगी कभी-कभी अपने रास्ते में चुनौतियों का सामना कराती है। एक दिन, आर्यन की माता की बीमारी के चलते उन्हें शहर जाना पड़ा और वहाँ अच्छे अस्पताल में इलाज कराना पड़ा। इससे उनकी पढ़ाई पर असर पड़ा और उनके सपने ठीक से पूरे नहीं हो सके।

राहुल ने भी बड़ी मेहनत की, लेकिन उसके पास पर्याप्त संसाधन नहीं थे और उसका गुरु भी उसके सपनों की पूरी तरह समर्थन नहीं कर पाए। उसने अपने माता-पिता की सहायता से एक छोटे से दुकान खोली, लेकिन उसके मन में उस बड़े सपने की आग जलती रही।

वर्षों बाद, आर्यन ने डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी की और अब वह अपने माता-पिता की उम्मीद है। वह अच्छे अस्पताल में काम कर रहा है और उसके चेहरे पर खुशियों की मुस्कान है।

लेकिन राहुल के लिए जिन्दगी अधूरी ही रह गई। वह अपने सपने को पूरा नहीं कर सका और उसकी आंखों में ख्वाबों की कई कहानियाँ आज भी अधूरी बाकी हैं।

यह कहानी हमें यह सिखाती है कि कभी-कभी हमारी मेहनत और संघर्ष भी काम नहीं आते, और जिंदगी हमें अपने मंजिलों की दिशा में अच्छे-बुरे दिनों का सामना करना पड़ता है।

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