श्याम की रात, गहरे अंधकार में बसा एक छोटा सा गांव था। गांव के एक छोटे से घर में रहने वाला लड़का विजय अपनी ज़िंदगी के सबसे आलसी और खुद से ज्यादा सपनों में मग्न हो गया था। उसका सपना था कि वह एक दिन बड़ा आदमी बनेगा और अपने माता-पिता का नाम रोशनी में लेगा।

विजय का पिता गांव के एक सामान्य किसान था, जो अपने मेहनती हाथों से किसानी करके परिवार की जरूरियातों को पूरा करते थे। विजय की माता भी किसानी में मशगूल रहती थी, और उनके पास सिर्फ किसानी से मिलने वाली मानसिक सुख सुविधाएँ ही थीं।

विजय ने बचपन से ही पढ़ाई में रुचि दिखाई, लेकिन गांव की परिस्थितियों ने उसकी शिक्षा की पाबंदियों को बढ़ा दिया। उसके पास पढ़ाई के लिए सामग्री नहीं थी, लेकिन उसका आत्मविश्वास उसे कहीं और ले जाने का ख्वाब देखता रहता था।

विजय ने कई बार प्रयास किए कि वह अध्ययन कर सके, लेकिन उसकी माता-पिता की आर्थिक स्थिति इसे बराबर नहीं करने देती थी। फिर भी, विजय ने हार नहीं मानी और जब भी समय मिलता, वह खुद से पढ़ाई करता रहता था।

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